बिहार में बिजली की मांग पांच गुना बढ़ने के बाद सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन नीति पर जोर

S Sakar(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 4:27 pm बजे)
बिहार में बिजली की मांग पांच गुना बढ़ने के बाद सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन नीति पर जोर
चित्र: Giant Asparagus / Pexels

बिहार में बिजली की मांग में पिछले एक दशक में अभूतपूर्व पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो राज्य के तेजी से बढ़ते आर्थिक विकास और शहरीकरण का स्पष्ट संकेत है। 16 जुलाई, 2026 को राज्य ने 9,475 मेगावाट (MW) की रिकॉर्ड बिजली मांग का अनुभव किया, जबकि एक दशक पहले यह आंकड़ा लगभग 1,800 MW था। यह विशाल वृद्धि छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी है, क्योंकि यह राज्य में बढ़ती औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय गतिविधियों को दर्शाता है।

बिजली की यह बढ़ती मांग राज्य में व्यापार और उद्योग के विस्तार के लिए एक मूलभूत आवश्यकता है। "मेगावाट" (MW) बिजली की शक्ति को मापने की एक इकाई है; 9,475 MW का अर्थ है कि राज्य को एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में विद्युत ऊर्जा की आवश्यकता थी। यह आंकड़ा दर्शाता है कि कारखानों, दुकानों, कार्यालयों और घरों में बिजली का उपयोग काफी बढ़ गया है। इस बढ़ती मांग को प्रभावी ढंग से पूरा करने और ऊर्जा के टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल स्रोतों की ओर एक सुचारु संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए, बिहार सरकार सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन नीतियों पर आक्रामक रूप से काम कर रही है।

सौर ऊर्जा सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके बिजली बनाने की एक विधि है, जो स्वच्छ, अक्षय और पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है। वहीं, हरित हाइड्रोजन एक अत्याधुनिक स्वच्छ ईंधन है जिसे नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर या पवन ऊर्जा) का उपयोग करके पानी से उत्पादित किया जाता है। यह प्रक्रिया कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है। सरकार की ये नीतियां न केवल बिजली की आपूर्ति को स्थिर और विश्वसनीय बनाने में मदद करेंगी, बल्कि बिहार के व्यापारिक समुदाय के लिए नए और आकर्षक व्यावसायिक अवसर भी पैदा करेंगी।

उदाहरण के लिए, सौर पैनलों की स्थापना, रखरखाव और बिक्री में विशेषज्ञता रखने वाले ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए नए रास्ते खुलेंगे। हरित हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और वितरण से संबंधित परियोजनाओं में निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके अतिरिक्त, एक स्थिर और सस्ती बिजली आपूर्ति व्यवसायों के लिए परिचालन लागत को कम कर सकती है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और उत्पादकता में सुधार होगा। यह कदम बिहार के व्यवसायों के लिए एक मजबूत और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिससे राज्य अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम कर सके और एक स्वच्छ, हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ सके।

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