बिहार हरित हाइड्रोजन नीति 2026: ₹16,000 करोड़ का निवेश, 12,000 नौकरियों का लक्ष्य

ThisNews Desk
बिहार हरित हाइड्रोजन नीति 2026: ₹16,000 करोड़ का निवेश, 12,000 नौकरियों का लक्ष्य
चित्र: Igor Passchier / Pexels

बिहार सरकार राज्य में हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था विकसित करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में बिहार हरित हाइड्रोजन नीति 2026 के मसौदे की समीक्षा की है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य भर में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और इसमें निवेश को बढ़ावा देना है।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू बिहार के विभिन्न स्थानों पर हरित हाइड्रोजन संयंत्रों की स्थापना की संभावनाओं का पता लगाना है। अधिकारियों को विशेष रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) द्वारा संचालित बरौनी रिफाइनरी और हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड (HURL) के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है ताकि ऐसी सुविधाओं की स्थापना की व्यवहार्यता का आकलन किया जा सके।

प्रस्तावित बिहार हरित हाइड्रोजन नीति 2026 से लगभग ₹16,000 करोड़ का महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। इस निवेश से राज्य भर में लगभग 12,000 नए रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों और उद्यमियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर और आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार करेगा, जिससे एक नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित होगा।

यह जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 21 से 25 सितंबर, 2026 के बीच हुई मसौदा नीति की समीक्षा बैठकों से मिली है। इन बैठकों में ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ ​​बुलू मंडल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, प्रधान सचिव (वित्त) विनय कुमार, ऊर्जा सचिव अजय यादव और मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड ने भी राज्य में हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के विकास पर एक प्रस्तुति दी।

हरित हाइड्रोजन एक स्वच्छ ईंधन है जिसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, जैसे सौर या पवन ऊर्जा का उपयोग करके उत्पादित किया जाता है। यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद करता है। यह राज्य-स्तरीय नीति व्यापक राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य 2030 तक कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन की वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता प्राप्त करना है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) की भी 2030 तक अपनी रिफाइनरी में हाइड्रोजन के उपयोग का 50 प्रतिशत हरित हाइड्रोजन में बदलने की योजना है। बरौनी रिफाइनरी भी अपनी क्षमता को 6 से बढ़ाकर 9 मिलियन टन प्रति वर्ष कर रही है, जो इस पहल के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

वर्तमान में, बिहार हरित हाइड्रोजन नीति 2026 अपने मसौदा समीक्षा चरण में है, और अधिकारियों को इसके कार्यान्वयन के लिए एक रोडमैप तैयार करने का काम सौंपा गया है। यह पहल बिहार को आत्मनिर्भर स्वच्छ ऊर्जा केंद्र के रूप में स्थापित करेगी और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देगी।

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