बिहार SLBC की 98वीं बैठक में ऋण प्रवाह और सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा

ThisNews Desk
बिहार SLBC की 98वीं बैठक में ऋण प्रवाह और सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा
चित्र: Pixabay / Pexels

पटना में मंगलवार, 22 सितंबर, 2026 को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC), बिहार की 98वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार में ऋण प्रवाह, वित्तीय प्रगति और विभिन्न सरकार-प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा करना था। विशेष रूप से, वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए वार्षिक ऋण योजना के तहत प्राप्तियों का मूल्यांकन किया गया।

इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता बिहार के उपमुख्यमंत्री-सह-वित्त मंत्री, बिजेंद्र प्रसाद यादव ने की। ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा भी उपस्थित थे। वित्त, कृषि, सहकारिता, डेयरी, मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन जैसे विभागों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विकास आयुक्त और जीविका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। भारतीय स्टेट बैंक के संयोजकत्व में SLBC राज्य में बैंकरों का सर्वोच्च निकाय है, जो आर्थिक विकास और बैंकिंग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए तिमाही बैठकें करता है।

बैठक में वित्तीय समावेशन और आर्थिक विकास के उद्देश्य से कई सरकारी योजनाओं पर चर्चा की गई। इनमें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना (PMFME), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम-स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शामिल थीं। समिति ने प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) और अटल पेंशन योजना की प्रगति की भी समीक्षा की।

प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को ऋण देने पर विशेष ध्यान दिया गया। MSMEs छोटे व्यवसाय होते हैं जो अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, रोजगार पैदा करते हैं और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देते हैं। समीक्षा में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) फसल ऋण, डिजिटल KCC और कृषि अवसंरचना कोष के तहत वित्तपोषण शामिल था। पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए KCC ऋण की प्रगति का भी आकलन किया गया, साथ ही इन क्षेत्रों के लिए औपचारिक ऋण तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों पर भी विचार किया गया। बैठक में जीविका से जुड़े स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं के लिए बैंक लिंकेज और व्यक्तिगत वित्तपोषण पर भी चर्चा हुई। अन्य विषयों में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) वसूली, बैंकिंग विस्तार, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (RSETIs) और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के माध्यम से कौशल विकास पहल, व्यापार और निर्यात प्रोत्साहन, प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में ऋण पुनर्गठन, डिजिटल वित्तीय समावेशन, वित्तीय साक्षरता केंद्रों (FLCs) के माध्यम से वित्तीय साक्षरता पहल और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का वित्तीय समावेशन तथा स्टार्टअप के लिए क्रेडिट गारंटी शामिल थे।

यह समीक्षा बिहार के व्यवसायों, MSMEs, व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सीधे तौर पर संस्थागत ऋण तक उनकी पहुंच और विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को प्रभावित करती है। कृषि और MSMEs जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और छोटे उद्यमों के विकास में सहायता मिल सकती है। मुद्रा और पीएम-स्वनिधि जैसी योजनाएं सूक्ष्म-उद्यमियों और सड़क विक्रेताओं को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। जीविका के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को समर्थन महिलाओं की उद्यमिता और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है। डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता सहित बेहतर वित्तीय समावेशन का उद्देश्य अधिक व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में एकीकृत करना है, जिससे उन्हें अधिक सुरक्षा और अवसर मिल सकें।

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