बिहार में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उद्यमिता को बढ़ावा देने में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (BRLPS), जिसे जीविका के नाम से जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के तहत संचालित यह कार्यक्रम, विश्व बैंक के शुरुआती सहयोग से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से ग्रामीण गरीबों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान का लक्ष्य रखता है।
वर्ष 2026 में, जीविका कार्यक्रम महिला उद्यमियों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और नए अवसर प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत, जीविका दीदियां स्वरोजगार और व्यवसाय विस्तार के लिए ₹2 लाख तक के ऋण (लोन) की पात्र हैं। ऋण एक ऐसी राशि होती है जो बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा दी जाती है और जिसे ब्याज सहित चुकाना होता है। उदाहरण के लिए, समस्तीपुर जिले में लगभग 3,800 महिलाओं को ₹20,000 की दूसरी किस्त मिलने वाली है, जो एक अनुदान (ग्रांट) के रूप में दी जा रही है। अनुदान वह राशि होती है जिसे चुकाना नहीं पड़ता। इसके अतिरिक्त, स्वयं सहायता समूह अब ₹10 लाख तक का ऋण प्राप्त कर सकते हैं, और सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹1000 करोड़ के ऋण वितरण का लक्ष्य रखा है।
कार्यक्रम की सफलता के कई हालिया उदाहरण हैं। जुलाई 2026 में, मुजफ्फरपुर जिले में बेला बाग क्लस्टर, जिसे महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्रबंधित किया जाता है, ने विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) उद्यमों से ₹19 करोड़ का शानदार कारोबार (टर्नओवर) हासिल किया। कारोबार का मतलब है किसी व्यवसाय द्वारा एक निश्चित अवधि में की गई कुल बिक्री। इस पहल ने स्थायी रोजगार के अवसर पैदा किए हैं और यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत संचालित होती है, जिसमें बिहार उद्योग विभाग बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) प्रदान करता है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी का अर्थ है सरकार और निजी कंपनियों का मिलकर किसी परियोजना पर काम करना।
एक और प्रेरणादायक कहानी शीओहर और सीतामढ़ी की आमना खातून की है, जिनके लाख की चूड़ियों के व्यवसाय को जीविका का समर्थन मिला। उनके व्यवसाय का वार्षिक कारोबार अब ₹15-20 लाख है और इसमें 10 महिलाओं सहित 13 लोग कार्यरत हैं। उन्होंने ₹9.75 लाख का ऋण चुका दिया है और ₹20-25 लाख के अतिरिक्त निवेश की योजना बना रही हैं। ये सफलताएं बिहार में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता के लिए जीविका के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती हैं।
