पटना में 843 करोड़ रुपये की लागत से 31 नालों को एसटीपी से जोड़ा जाएगा, गंगा होगी स्वच्छ

ThisNews Desk
पटना में 843 करोड़ रुपये की लागत से 31 नालों को एसटीपी से जोड़ा जाएगा, गंगा होगी स्वच्छ
चित्र: Ravi Jha / Pexels

पटना में गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने और शहरी स्वच्छता में सुधार लाने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना शुरू की जा रही है। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) द्वारा नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 843 करोड़ रुपये की लागत से 31 प्रमुख नालों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जोड़ने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य अनुपचारित अपशिष्ट जल को सीधे गंगा में गिरने से रोकना है।

इस परियोजना में तीन नए एसटीपी का निर्माण शामिल है, जिनकी कुल उपचार क्षमता 348 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) होगी। ये एसटीपी दीघा नहर, मंदिरी और मिट्टन घाट पर बनाए जाएंगे। मंदिरी एसटीपी की क्षमता 245 एमएलडी होगी और इस पर लगभग 616.55 करोड़ रुपये खर्च होंगे। दीघा नहर एसटीपी की क्षमता 85 एमएलडी होगी, जिसकी लागत 187 करोड़ रुपये अनुमानित है, जबकि मिट्टन घाट एसटीपी 18 एमएलडी क्षमता का होगा और इस पर लगभग 39 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इन सभी संयंत्रों में सीक्वेंसर बैच रिएक्टर (SBR) तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो अपशिष्ट जल के उपचार के लिए एक आधुनिक और कुशल तरीका है।

इसके अतिरिक्त, दानापुर कैंटोनमेंट, दीघा घाट नाला, कुर्जी नाला, राजापुर नाला, मंदिरी नाला, अंता घाट और मिट्टन घाट सहित सात स्थानों पर इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस) प्रस्तावित हैं। इनकी संयुक्त क्षमता 40 करोड़ लीटर प्रतिदिन होगी, जो नालों से अपशिष्ट जल को एसटीपी तक पहुंचाने में मदद करेंगे।

यह परियोजना अक्टूबर 2026 तक बोली प्रक्रिया शुरू होने के बाद, 2026 के अंत तक निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है और 2028 की शुरुआत तक पूरी होने की संभावना है। इसमें इंटरसेप्शन एंड डायवर्सन (I&D) तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे मौजूदा नालों से अपशिष्ट जल को एसटीपी तक मोड़ा जा सकेगा और बड़े पैमाने पर नई खुदाई की आवश्यकता कम होगी। पटना में वर्तमान में आठ एसटीपी चालू हैं, जिनकी कुल क्षमता 367 एमएलडी है और वे प्रतिदिन 222 एमएलडी अपशिष्ट जल का उपचार कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, कुर्जी और राजापुर नाले का पानी पहले से ही दीघा एसटीपी में मोड़ा जा रहा है, जो प्रतिदिन लगभग 45 एमएलडी का उपचार करता है।

यह विकास बिहार के छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। गंगा नदी का स्वच्छ होना पर्यटन और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए फायदेमंद होगा। बेहतर स्वच्छता बुनियादी ढांचा सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुधारेगा, जिससे कार्यबल अधिक उत्पादक बनेगा। निर्माण चरण में सिविल इंजीनियरिंग, सामग्री आपूर्ति और प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन से जुड़े व्यवसायों के लिए रोजगार के अवसर और अनुबंध उत्पन्न होंगे। इसके अलावा, एक एकीकृत अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली से बार-बार सड़क की खुदाई कम होगी, जिससे शहरी वाणिज्य और दैनिक जीवन में आने वाली बाधाएं कम होंगी। बिहार शहरी विकास एवं आवास विभाग इस पहल का प्राथमिक स्रोत है, जिसमें बुडको के प्रबंध निदेशक अनिमेष कुमार पराशर और बुडको की पीआरओ श्वेता भास्कर ने विवरण प्रदान किए हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर में और पढ़ें