बिहार कैबिनेट ने पटना में राज्य के पहले टेक्नोलॉजी पार्क को मंज़ूरी दी, 5,000 से अधिक रोज़गार के अवसर

ThisNews Desk
बिहार कैबिनेट ने पटना में राज्य के पहले टेक्नोलॉजी पार्क को मंज़ूरी दी, 5,000 से अधिक रोज़गार के अवसर
चित्र: Anderson Wei / Pexels

बिहार कैबिनेट ने 12 अक्टूबर, 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में पटना के गर्दनीबाग में राज्य के पहले टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना को मंज़ूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (सरकारी कंपनी) एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसे बिहार वित्त (संशोधन) नियम के तहत नामित किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने इस निर्णय की आधिकारिक घोषणा की। इस पार्क के निर्माण पर अनुमानित 413 करोड़ रुपये की लागत आएगी और यह 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा करेगा।

लगभग 3.80 एकड़ भूमि पर बनने वाला यह टेक्नोलॉजी पार्क लगभग 7.43 लाख वर्ग फुट क्षेत्र को कवर करेगा। इसमें दो 11-मंजिला आईटी-सह-वाणिज्यिक ब्लॉक, एक सात-मंजिला होटल, एक आठ-मंजिला आवासीय ब्लॉक, खुदरा दुकानें, खाद्य और पेय सुविधाएं और लगभग 300 कारों के लिए पार्किंग की सुविधा होगी। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बिहार सरकार को इस परियोजना से 90 साल की लीज़ अवधि (किराए पर देने की अवधि) के दौरान लगभग 1071 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है, जिसमें सरकार को अपने बजट से कोई पैसा निवेश नहीं करना होगा।

यह टेक्नोलॉजी पार्क बिहार आईटी नीति 2024 और बिहार ग्लोबल कॉम्पिटेंस सेंटर्स (GCC) नीति 2026 के तहत विकसित किया जाएगा, जिसे 5 फरवरी, 2026 को मंज़ूरी मिली थी। ग्लोबल कॉम्पिटेंस सेंटर्स (GCC) बड़ी कंपनियों के ऐसे केंद्र होते हैं जहाँ वे विशिष्ट कार्य जैसे रिसर्च, डेवलपमेंट या आईटी सपोर्ट प्रदान करते हैं। बिहार सरकार अपनी बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति 2026 को भी बढ़ावा दे रही है, जिसका लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में पाँच लाख छात्रों को AI में प्रशिक्षित करना और AI प्रौद्योगिकियों में निवेश आकर्षित करना है। इसके अतिरिक्त, आईआईटी पटना में एक रिसर्च पार्क (250 करोड़ रुपये) और आईआईटी बिहटा में एक एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (60 करोड़ रुपये) के लिए 468 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिससे एआई क्षेत्र में 10,000 से अधिक रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है।

यह पहल बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका उद्देश्य राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आईटी-सक्षम सेवाओं (ITES) और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिज़ाइन और विनिर्माण (ESDM) क्षेत्रों को मज़बूत करना है। आईटी-सक्षम सेवाएँ (ITES) वे सेवाएँ हैं जो सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करती हैं, जैसे कॉल सेंटर या डेटा प्रोसेसिंग। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिज़ाइन और विनिर्माण (ESDM) इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के डिज़ाइन और उत्पादन से संबंधित है। यह परियोजना निवेश आकर्षित करने, स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार पैदा करने और कुशल प्रतिभा के अन्य राज्यों में पलायन को कम करने के लिए डिज़ाइन की गई है। सरकार के आईटी परियोजनाओं के कार्यान्वयन और निगरानी को मज़बूत करने तथा सार्वजनिक सेवाओं के डिजिटलीकरण में तेज़ी लाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का क्षेत्रीय, ज़िला और ब्लॉक स्तरों तक विस्तार भी किया जा रहा है। ये सामूहिक प्रयास बिहार को पूर्वी भारत में एक उभरते हुए प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में स्थापित करने, नवाचार को बढ़ावा देने और व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए नए अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखते हैं।

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