मुख्यमंत्री ने हाजीपुर में पेपरलेस रजिस्ट्री सुविधा का शुभारंभ किया

ThisNews Desk(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 4:13 pm बजे)
मुख्यमंत्री ने हाजीपुर में पेपरलेस रजिस्ट्री सुविधा का शुभारंभ किया
चित्र: Rizki Koto / Pexels

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 जुलाई, 2026 को हाजीपुर, वैशाली जिले में पेपरलेस रजिस्ट्री सुविधा का उद्घाटन किया, जो राज्य में डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल का उद्देश्य संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाना है, जिससे कागजी कार्रवाई और समय की बचत होगी, साथ ही पारदर्शिता बढ़ेगी। छोटे व्यवसायी, ठेकेदार और उद्यमी इस नई प्रणाली से लाभान्वित होंगे, क्योंकि यह पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगी और कार्यालयों के भौतिक दौरे की आवश्यकता को कम करेगी।

यह नई प्रणाली ई-फाइलिंग (ऑनलाइन दस्तावेज़ जमा करना), ई-साइन (डिजिटल हस्ताक्षर) और बायोमेट्रिक सत्यापन (उंगलियों के निशान या रेटिना स्कैन से पहचान) जैसी सुविधाओं को शामिल करती है। बिहार सरकार का मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग इसे लागू कर रहा है। हाजीपुर में लॉन्च होने के बाद, इसका लक्ष्य 17 अगस्त, 2026 तक बिहार के सभी 141 निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस पंजीकरण का विस्तार करना है। राज्य के 51 कार्यालयों में यह प्रणाली पहले ही शुरू हो चुकी है, और नालंदा में भी इसे जल्द लागू किया जाएगा। यह प्रणाली भूमि संबंधी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने और सरकारी राजस्व (सरकार की आय) बढ़ाने में भी मदद करेगी। नए सर्किल रेट (सरकारी दरें) से कम पंजीकरण के बावजूद राजस्व में 131 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। पंजीकरण पूरा होने पर डिजिटल डीड (पंजीकृत दस्तावेज़ की डिजिटल प्रति) व्हाट्सएप या ईमेल के माध्यम से भेजी जाएगी। जीआईएस तकनीक (भौगोलिक सूचना प्रणाली) का उपयोग साइट निरीक्षण के लिए भी किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होगी।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण घटक "होम रजिस्ट्रेशन" सेवा है, जिसे पहले 13 जनवरी, 2026 को 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों के लिए घोषित किया गया था और 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होना था। अब इसे 75 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए विस्तारित किया गया है, जिससे वे अपने घर से संपत्ति पंजीकरण पूरा कर सकते हैं। वैशाली जिला इस होम रजिस्ट्रेशन सुविधा में अग्रणी रहा है, जिसने 27 जुलाई, 2026 तक राज्य भर में कुल 9 दस्तावेजों में से 7 का सफलतापूर्वक पंजीकरण किया है।

पेपरलेस पंजीकरण में सहायता करने वाले सेवा प्रदाताओं को दस्तावेज़ के मूल्य के आधार पर पारिश्रमिक (सेवा शुल्क) मिलेगा: 1 लाख रुपये तक के दस्तावेजों के लिए 1000 रुपये, 5 लाख रुपये तक के लिए 2500 रुपये, और 5 लाख रुपये से अधिक के दस्तावेजों के लिए 5000 रुपये।

हालांकि, इस डिजिटल पंजीकरण प्रणाली को विरोध का सामना करना पड़ा है। 8 अगस्त, 2026 को हाजीपुर, पातेपुर और महुआ में लेखकों और स्टाम्प विक्रेताओं ने नई पेपरलेस प्रणाली का विरोध किया। उन्होंने नौकरी छूटने और साइबर धोखाधड़ी (डिजिटल माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी) की संभावनाओं पर चिंता व्यक्त की, खासकर अनिवार्य हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान और गवाहों को हटाने के कारण। उनका तर्क है कि पहचान के लिए केवल ओटीपी (वन-टाइम पासवर्ड) पर निर्भर रहना जोखिम भरा है।

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