बिहार सरकार जीविका दीदियों को गांव में रोजगार के लिए देगी ₹60,000 की सब्सिडी

S Sakar(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 2:06 pm बजे)
बिहार सरकार जीविका दीदियों को गांव में रोजगार के लिए देगी ₹60,000 की सब्सिडी
चित्र: fishshoto / Pexels

बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। वर्ष 2026 में की गई इस घोषणा के तहत, बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की 'जीविका दीदियों' को अपना उद्यम स्थापित करने के लिए ₹60,000 की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह कदम ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रोत्साहन है।

'जीविका दीदी' उन महिलाओं को संदर्भित करता है जो स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा हैं। स्वयं सहायता समूह (SHG) महिलाओं के छोटे-छोटे समूह होते हैं जो अपनी बचत को इकट्ठा करते हैं और एक-दूसरे की वित्तीय और सामाजिक सहायता करते हैं, खासकर छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए। जीविका, बिहार सरकार की एक संस्था है जो ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर पैदा करने और गरीबी उन्मूलन के लिए काम करती है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य इन दीदियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें ग्रामीण स्तर पर छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

सब्सिडी का अर्थ है सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता, जिसका उद्देश्य किसी विशेष गतिविधि को बढ़ावा देना या लागत को कम करना होता है। इस मामले में, ₹60,000 की सब्सिडी जीविका दीदियों को उनके नए उद्यमों को स्थापित करने में मदद करेगी, जिससे उन्हें शुरुआती पूंजी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह राशि उन्हें दुकान खोलने, छोटा विनिर्माण इकाई लगाने, कृषि-आधारित व्यवसाय शुरू करने या किसी अन्य स्थानीय व्यवसाय में निवेश करने में सहायता करेगी। यह छोटे व्यवसाय मालिकों और उद्यमियों के लिए एक बड़ी राहत होगी, क्योंकि अक्सर शुरुआती पूंजी की कमी एक बड़ी चुनौती होती है।

यह योजना न केवल व्यक्तिगत जीविका दीदियों को लाभान्वित करेगी, बल्कि पूरे ग्रामीण समुदाय में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। जब एक दीदी अपना व्यवसाय शुरू करती है, तो वह अक्सर अन्य स्थानीय लोगों को भी रोजगार देती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि बढ़ती है। यह महिला सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां महिलाएं न केवल आय अर्जित कर रही हैं बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। बिहार के ग्रामीण परिदृश्य में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए यह एक दूरगामी कदम साबित होगा, जिससे छोटे कारोबारियों और ठेकेदारों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।

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