बिहार कैबिनेट ने सरकारी भवनों के लिए 500 मेगावाट रूफटॉप सौर परियोजना को मंजूरी दी

ThisNews Desk
बिहार कैबिनेट ने सरकारी भवनों के लिए 500 मेगावाट रूफटॉप सौर परियोजना को मंजूरी दी
चित्र: Budget Bizar / Pexels

बिहार कैबिनेट ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक में राज्य भर के सरकारी भवनों पर 500 मेगावाट की रूफटॉप सौर परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय 11 जुलाई, 2026 को लिया गया, जिसमें कुल 22 अन्य विकास प्रस्तावों को भी हरी झंडी मिली। यह परियोजना बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने और राज्य को हरित ऊर्जा की ओर अग्रसर करने की क्षमता रखती है।

छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि रूफटॉप सौर परियोजना क्या है। इसका सीधा अर्थ है कि सरकारी इमारतों की छतों पर सौर पैनल लगाए जाएंगे। ये पैनल सूर्य के प्रकाश को बिजली में बदलेंगे, जिसका उपयोग उन इमारतों में किया जाएगा। इससे सरकारी कार्यालयों और प्रतिष्ठानों के बिजली के बिलों में भारी कमी आएगी, जिससे राज्य के खजाने पर बोझ कम होगा। साथ ही, यह परियोजना बिहार को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी, जो पर्यावरण के लिए भी एक स्वच्छ और स्थायी समाधान है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। "चरणबद्ध कार्यान्वयन" का अर्थ है कि इसे एक साथ पूरे राज्य में शुरू करने के बजाय, विभिन्न चरणों या हिस्सों में पूरा किया जाएगा। यह बिहार के बुनियादी ढाँचे के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना से ठेकेदारों, सौर पैनल आपूर्तिकर्ताओं, इंस्टॉलेशन कंपनियों और रखरखाव सेवा प्रदाताओं के लिए बड़े व्यावसायिक अवसर पैदा होने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

कैबिनेट ने इस बैठक में कुल 22 अन्य विकास प्रस्तावों को भी मंजूरी दी, जो राज्य के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, 500 मेगावाट की रूफटॉप सौर परियोजना ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह पहल बिहार को नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी और भविष्य में निजी क्षेत्र के लिए भी ऐसी परियोजनाओं में निवेश करने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

यह परियोजना न केवल सरकारी भवनों के लिए बिजली की लागत को कम करेगी बल्कि बिहार को हरित ऊर्जा अपनाने में भी अग्रणी बनाएगी। यह दीर्घकालिक रूप से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका सीधा लाभ राज्य के नागरिकों और व्यवसायों को मिलेगा।

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