बिहार सरकार भवन निर्माण अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाएगी; नई उपविधि 2026 का मसौदा तैयार

ThisNews Desk
बिहार सरकार भवन निर्माण अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाएगी; नई उपविधि 2026 का मसौदा तैयार
चित्र: Jermaine Lewis / Pexels

बिहार सरकार भवन निर्माण की स्वीकृति प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए बिहार भवन उपविधि 2026 का मसौदा तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और राज्य में निर्माण तथा नियोजित शहरी विकास के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करना है।

5 सितंबर, 2026 को पटना में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में मंत्रियों के एक उच्च-स्तरीय समूह ने इन मसौदा नियमों की समीक्षा की। शहरी विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि ये उपविधियाँ पारदर्शिता, तीव्र प्रक्रियाओं और सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित हैं। शहरी विकास एवं आवास विभाग (UDHD) के प्रधान सचिव विनय कुमार ने प्रस्तावित उपविधियों के विस्तृत प्रावधान प्रस्तुत किए। बैठक में सूचना एवं जनसंपर्क और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग मंत्री संजय कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी और मंत्री भी उपस्थित थे। CREDAI बिहार, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, बिल्डर्स एसोसिएशन और बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री जैसे उद्योग निकायों के प्रतिनिधि भी इस महत्वपूर्ण चर्चा का हिस्सा बने।

UDHD द्वारा तैयार की गई इन प्रस्तावित उपविधियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब नए भवन के चारों ओर खुली जगह छोड़ने की सख्त आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। डेवलपर्स (भवन निर्माता) को अब आमतौर पर आपातकालीन पहुँच (emergency access) के लिए केवल एक तरफ पर्याप्त जगह छोड़नी होगी। छोटे और मध्यम आकार के आवासीय भवनों, जिनकी ऊँचाई आमतौर पर 24 मीटर तक होती है, के लिए स्व-प्रमाणीकरण (self-certification) प्रणाली शुरू की जा रही है। स्व-प्रमाणीकरण का अर्थ है कि पंजीकृत वास्तुकार (architects) और तकनीकी विशेषज्ञ योजनाओं को स्वयं प्रमाणित कर सकते हैं, जिन्हें ऑनलाइन अपलोड किया जा सकेगा। शुल्क भुगतान के बाद त्वरित स्वीकृति की उम्मीद है। मसौदे में "मानित स्वीकृति" (deemed approval) का भी प्रावधान है, जिसका अर्थ है कि यदि अधिकारी एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर निर्णय नहीं लेते हैं, तो स्वीकृति स्वतः मिल जाएगी। इससे नौकरशाही में होने वाली देरी कम होगी। अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तनों में पार्किंग के लिए स्पष्ट नियम, जिसमें पोडियम और बेसमेंट विकल्प शामिल हैं, और एक निश्चित आकार से बड़े भूखंडों के लिए अनिवार्य वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) शामिल है।

ये उपविधियाँ वर्तमान में मसौदा चरण में हैं। लगभग 29 जून, 2026 को इनके प्रकाशन के बाद सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित किए गए थे। बिहार गजट में इनके प्रकाशन के बाद ये लागू होने की उम्मीद है।

ये सुधार बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। MSMEs का अर्थ है छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय। नियामक आवश्यकताओं को सरल बनाकर और स्वीकृतियों में तेजी लाकर, सरकार का लक्ष्य डेवलपर्स, बिल्डरों और संपत्ति मालिकों के लिए प्रक्रियात्मक कठिनाइयों को कम करना है। इससे निर्माण और निवेश को बढ़ावा मिलने, बुनियादी ढाँचे (सड़कें, भवन आदि जैसी मूलभूत सुविधाएँ) के विकास में सहायता मिलने, आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा मिलने और पूरे राज्य में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, विशेष रूप से पटना और दानापुर जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में अपार्टमेंट परियोजनाओं और वाणिज्यिक भवनों को लाभ होगा।

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