भारत टेक्स 2026 से बिहार के टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

S Sakar(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 2:05 pm बजे)
भारत टेक्स 2026 से बिहार के टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश को मिलेगी नई रफ्तार
चित्र: Sharath G. / Pexels

नई दिल्ली में 14 से 17 जुलाई, 2026 तक आयोजित भारत के प्रमुख वैश्विक वस्त्र कार्यक्रम 'भारत टेक्स 2026' में बिहार ने एक महत्वपूर्ण भागीदार राज्य के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस आयोजन के दौरान, बिहार ने वस्त्र और परिधान क्षेत्र में ₹1450 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं, जिससे राज्य भर में 40,500 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

भारत मंडपम में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में बिहार ने अपनी समृद्ध वस्त्र विरासत, भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त हथकरघा उत्पादों और निवेशक-अनुकूल 'वस्त्र एवं चमड़ा नीति (संशोधित) 2025' को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया। GI टैग उन उत्पादों को मिलता है जिनकी एक खास भौगोलिक पहचान होती है और वे अपनी गुणवत्ता या प्रतिष्ठा के लिए जाने जाते हैं, जैसे भागलपुरी सिल्क। इस नीति का उद्देश्य राज्य में कपड़ा और चमड़ा उद्योगों को बढ़ावा देना है, जिसमें निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहन शामिल हैं।

इस आयोजन में बिहार ने प्रमुख वस्त्र और परिधान कंपनियों के साथ 16 समझौता ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन एक प्रकार का प्रारंभिक समझौता है जो दो या दो से अधिक पक्षों के बीच भविष्य के बड़े समझौतों के लिए आपसी सहमति और इरादे को दर्शाता है। ये निवेश राज्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेंगे और छोटे तथा मध्यम व्यवसायों (MSMEs) के लिए विकास के नए रास्ते खोलेंगे।

बिहार पवेलियन में व्यापार से व्यापार (B2B) और व्यापार से सरकार (B2G) की कई बैठकें आयोजित की गईं। B2B बैठकें तब होती हैं जब एक व्यवसाय दूसरे व्यवसाय के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करता है, जबकि B2G बैठकें व्यवसायों और सरकारी संस्थाओं के बीच होती हैं। इन सत्रों में निवेशकों के साथ बातचीत और ज्ञान साझाकरण भी शामिल था, जिससे बिहार में निवेश के अवसरों को उजागर किया गया।

बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और उद्योग मंत्री श्री नीतीश मिश्रा ने इस आयोजन में राज्य का प्रतिनिधित्व किया। उद्योग सचिव श्री कुंदन कुमार और हथकरघा एवं रेशम उत्पादन निदेशक श्री यशपाल मीना ने भी बिहार में निवेश के आकर्षक माहौल पर प्रकाश डाला। इन प्रयासों से बिहार के वस्त्र उद्योग को नई गति मिलेगी और स्थानीय कारीगरों तथा उद्यमियों को लाभ होगा।

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