बिहार के वाहन मालिकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। राज्य परिवहन विभाग ने परमिट संबंधी विभिन्न कार्यों के लिए हलफनामे (affidavit) की अनिवार्य आवश्यकता को समाप्त कर दिया है। यह महत्वपूर्ण बदलाव 24 अगस्त, 2026 से प्रभावी हो गया है। इसका मतलब है कि अब वाहन मालिकों को परमिट आवेदन या उससे जुड़े किसी भी काम के लिए अलग से हलफनामा तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बजाय, विभाग ने निर्देश दिया है कि अब स्व-सत्यापित (self-attested) दस्तावेजों को स्वीकार किया जाएगा।
राज्य परिवहन प्राधिकरण (State Transport Authority) द्वारा लिया गया यह निर्णय, केंद्र सरकार की "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" (Ease of Doing Business) पहल के अनुरूप है। "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" का सीधा अर्थ है कि व्यवसायों के लिए सरकारी प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाना ताकि उन्हें काम करने में आसानी हो। पहले, परमिट संबंधी कार्यों के लिए हलफनामा अनिवार्य था, यह नियम 9 फरवरी, 2021 को राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में स्थापित किया गया था।
इस नई नीति का उद्देश्य वाहन परमिट प्राप्त करने और प्रबंधित करने की प्रक्रिया को सरल बनाना है। बिहार परिवहन विभाग और उसके क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTAs) इस नई नीति को लागू करने वाले प्रमुख सरकारी निकाय हैं। जमा किए गए दस्तावेजों का सत्यापन 'वाहन-4.0' (Vahan-4.0) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया और भी अधिक डिजिटल और सुव्यवस्थित हो जाएगी।
यह नीतिगत बदलाव बिहार में वाहन मालिकों, जिनमें छोटे और मध्यम उद्यम (MSMEs), व्यापारी, ठेकेदार, और उद्यमी शामिल हैं, को महत्वपूर्ण रूप से लाभ पहुंचाएगा। एमएसएमई वे छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय होते हैं जो अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हलफनामे की आवश्यकता को समाप्त करके, विभाग का लक्ष्य वाहन मालिकों के समय और धन दोनों की बचत करना है, जो अन्यथा इन दस्तावेजों को तैयार करने में खर्च होते थे। प्रक्रियाओं का यह सरलीकरण परिवहन विभाग की सेवाओं को अधिक सुलभ और कम समय लेने वाला बनाने की दिशा में एक कदम है, जिससे राज्य में व्यापार के लिए अधिक अनुकूल माहौल को बढ़ावा मिलेगा। इस नीति संशोधन से सीधे तौर पर कोई विशिष्ट निवेश या रोजगार सृजन के आंकड़े जुड़े नहीं हैं।
