बिहार में औद्योगिक विस्तार हेतु नियमों का सरलीकरण, निवेशकों को 30 दिन में स्वतः मंजूरी

ThisNews Desk
बिहार में औद्योगिक विस्तार हेतु नियमों का सरलीकरण, निवेशकों को 30 दिन में स्वतः मंजूरी
चित्र: Mike van Schoonderwalt / Pexels

बिहार राज्य औद्योगिक विस्तार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश रुंगटा ने इस बात पर जोर दिया है कि राज्य निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाकर आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए व्यापार करना आसान बनाने हेतु कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने और उनके सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए एक 'सिंगल-विंडो सिस्टम' (एकल खिड़की प्रणाली) लागू की है। यह प्रणाली एक ऐसा मंच है जहाँ उद्यमियों को विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित सभी अनुमतियाँ और स्वीकृतियाँ एक ही जगह से मिल सकती हैं, जिससे उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

इसके अतिरिक्त, उद्यमियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार किया गया है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से, निवेशक अपनी आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं और अपनी समस्याओं को प्रस्तुत कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण पहल यह है कि यदि कोई सरकारी विभाग किसी उद्यमी के 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (NOC – No Objection Certificate) या किसी अन्य अनुमोदन को 30 दिनों के भीतर प्रदान करने में विफल रहता है, तो उसे स्वतः ही स्वीकृत मान लिया जाएगा।

अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) एक ऐसा दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि किसी विशेष कार्य या परियोजना के लिए किसी सरकारी विभाग को कोई आपत्ति नहीं है। यह व्यवसायों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी आवश्यकता होती है। 30 दिन की स्वतः मंजूरी की यह व्यवस्था नौकरशाही देरी को कम करने और व्यापार शुरू करने या विस्तार करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए डिज़ाइन की गई है। यह उद्यमियों को अनिश्चितता से बचाता है और उन्हें अपने व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

सुरेश रुंगटा के अनुसार, ये उपाय बिहार में निवेश के माहौल को बेहतर बनाएंगे और राज्य को आर्थिक विकास के पथ पर आगे बढ़ाएंगे। यह छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा, क्योंकि उन्हें अक्सर सरकारी प्रक्रियाओं में अधिक समय और संसाधनों का निवेश करना पड़ता है। नियमों के सरलीकरण से नए व्यवसायों को स्थापित करना और मौजूदा व्यवसायों का विस्तार करना आसान हो जाएगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

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