बिहार पथ निर्माण विभाग को नाबार्ड से 21,000 करोड़ रुपये का ऋण, 100 सड़क-पुल परियोजनाएं होंगी वित्तपोषित

ThisNews Desk
बिहार पथ निर्माण विभाग को नाबार्ड से 21,000 करोड़ रुपये का ऋण, 100 सड़क-पुल परियोजनाएं होंगी वित्तपोषित
चित्र: Cầu Đường Việt Nam / Pexels

बिहार राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बिहार राज्य पथ निर्माण विभाग (RCD) ने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) से लगभग 21,000 करोड़ रुपये का एक बड़ा ऋण प्राप्त किया है। इस विशाल राशि का उपयोग राज्य भर में लगभग 100 सड़क और पुल परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाएगा, जिससे राज्य की कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व सुधार आने की उम्मीद है।

यह वित्तीय समझौता, जिसकी सूचना अगस्त 2026 में हस्ताक्षरित होने की है, बिहार के छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा। सड़कों और पुलों के निर्माण से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा, जिससे माल ढुलाई आसान और सस्ती हो जाएगी। उदाहरण के लिए, किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में कम समय लगेगा, जिससे उनकी उपज को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी और उनकी आय में वृद्धि हो सकती है। इसी तरह, व्यापारियों के लिए उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना अधिक कुशल हो जाएगा, जिससे व्यापारिक लागत कम होगी और वे अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा दे पाएंगे।

NABARD, जिसे अक्सर ग्रामीण भारत के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय संस्था के रूप में जाना जाता है, कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तपोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बैंक मुख्य रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से ऋण प्रदान करता है। इस ऋण के माध्यम से, बिहार में सड़कों और पुलों का जाल मजबूत होगा, जो न केवल यात्रा को सुगम बनाएगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा। बेहतर सड़कें नए उद्योगों और व्यवसायों को आकर्षित करने में मदद करती हैं, क्योंकि वे परिवहन और लॉजिस्टिक्स को आसान बनाती हैं, जिससे निवेश के लिए राज्य अधिक आकर्षक बनता है।

इन परियोजनाओं से निर्माण क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और श्रमिकों को सीधा लाभ होगा। लगभग 100 परियोजनाओं का मतलब है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में विकास का काम एक साथ चलेगा, जिससे समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय असमानताएं कम होंगी। यह पहल बिहार को एक अधिक सुलभ, आर्थिक रूप से जीवंत और व्यापार-अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका सीधा लाभ आम जनता और उद्यमी वर्ग को मिलेगा।

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