IIM मॉडल पर बदलेंगे बिहार के प्रोफेशनल कोर्स, रोजगार और स्किल पर होगा फोकस

S Sakar(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 4:01 pm बजे)
IIM मॉडल पर बदलेंगे बिहार के प्रोफेशनल कोर्स, रोजगार और स्किल पर होगा फोकस
चित्र: Multitech Institute / Pexels

बिहार सरकार 2026 में शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्रों में व्यापक सुधारों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रही है। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य राज्य में रोजगार सृजन और कौशल वृद्धि पर विशेष जोर देना है। मुख्यमंत्री सम्राट के नेतृत्व में, इन पहलों का लक्ष्य युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

राज्य सरकार का मानना है कि मजबूत शिक्षा और प्रभावी कौशल प्रशिक्षण ही आर्थिक विकास की कुंजी है। "कौशल विकास" का अर्थ है लोगों की क्षमताओं और हुनर को बढ़ाना ताकि वे विभिन्न उद्योगों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें या नए व्यवसाय शुरू कर सकें। यह न केवल व्यक्तियों को अधिक रोजगार योग्य बनाता है बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है।

इन सुधारों के तहत, सरकार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है जो सीधे उद्योगों की जरूरतों से जुड़े हों। इसे "उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण" कहा जाता है, जिसका मतलब है कि पढ़ाई और प्रशिक्षण वही होगा जिसकी बाजार में वास्तविक मांग है। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवा सीधे नौकरी पा सकें या अपना उद्यम (व्यवसाय) शुरू कर सकें।

हालांकि बिहार के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों द्वारा "आईआईएम मॉडल अपनाने" की कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है, फिर भी ये पहलें उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण और उद्यमिता विकास के सिद्धांतों के अनुरूप हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जैसे प्रमुख संस्थान अक्सर ऐसे मॉडल का पालन करते हैं जो छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देने के बजाय व्यावहारिक और उद्योग-संबंधित कौशल पर ध्यान केंद्रित करते हैं, साथ ही उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित करते हैं। "उद्यमिता विकास" का अर्थ है लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने और सफलतापूर्वक चलाने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना।

इन सुधारों से छोटे व्यवसाय मालिकों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ होगा। जब अधिक कुशल कार्यबल उपलब्ध होगा, तो व्यवसायों को बेहतर कर्मचारी मिलेंगे, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ेगी। साथ ही, नए उद्यमियों के उभरने से बाजार में नवाचार और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जो समग्र आर्थिक माहौल के लिए फायदेमंद है। सरकार की यह दूरदर्शी सोच बिहार के युवाओं के लिए उज्जवल भविष्य की नींव रख रही है और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होगी।

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