बिहार सरकार परिवहन नेटवर्क की निगरानी के लिए जीआईएस डिजिटल मानचित्र बनाएगी

ThisNews Desk
बिहार सरकार परिवहन नेटवर्क की निगरानी के लिए जीआईएस डिजिटल मानचित्र बनाएगी
चित्र: Monstera Production / Pexels

बिहार सरकार ने राज्य के परिवहन नेटवर्क की निगरानी के लिए एक भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित डिजिटल मानचित्र विकसित करने की योजना की घोषणा की है। यह पहल, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की देखरेख में, रेलवे लाइनों, राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों, जिला सड़कों, ग्रामीण मार्गों, पुलों और पुलियों सहित राज्य के संपूर्ण परिवहन बुनियादी ढांचे का एक व्यापक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी। यह प्रणाली बाढ़, जलभराव, कटाव, वन क्षेत्रों और परिवहन बुनियादी ढांचे के आसपास प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय जोखिमों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को भी एकीकृत करेगी। यह छोटे व्यवसायियों और ठेकेदारों के लिए परियोजना स्थलों और संभावित चुनौतियों को समझने में सहायक होगा।

इस जीआईएस डिजिटल मानचित्र का प्राथमिक उद्देश्य बुनियादी ढांचा योजना और परियोजना निगरानी को बढ़ाना है। यह अधिकारियों को कनेक्टिविटी का आकलन करने, मौजूदा बुनियादी ढांचे की कमियों की पहचान करने और भविष्य की विकास परियोजनाओं की अधिक प्रभावी ढंग से योजना बनाने में मदद करेगा। यह प्रणाली परिवहन लिंक के स्थानों और नेटवर्क कनेक्शन की स्पष्ट तस्वीर प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे परियोजनाओं की योजना और निष्पादन में पारदर्शिता और दक्षता आएगी। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना की प्रगति की व्यवस्थित निगरानी करने और संभावित अनियमितताओं की पहचान करने के लिए निर्माण से पहले और बाद में ली गई तस्वीरों को भी शामिल करेगी। यह ठेकेदारों के लिए काम की गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

यह डिजिटल मैपिंग प्रयास जनवरी 2026 से लागू राज्य सरकार के एक व्यापक जनादेश के अनुरूप है, जिसमें 50 करोड़ रुपये से अधिक की सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भू-स्थानिक विश्लेषण (geo-spatial analytics) अनिवार्य किया गया है। भू-स्थानिक विश्लेषण का अर्थ है भौगोलिक डेटा का उपयोग करके किसी क्षेत्र का अध्ययन करना, जिससे परियोजनाओं की योजना बनाते समय सटीक स्थान-आधारित जानकारी मिल सके। इस जनादेश के तहत, किसी भी वित्तीय स्वीकृति से पहले प्रत्येक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (बीआईआरएसएसी) से तकनीकी अनुमोदन प्राप्त करना होगा। डीपीआर एक विस्तृत योजना होती है जिसमें परियोजना के सभी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का वर्णन होता है। इसका उद्देश्य "परीक्षण और त्रुटि" (trial and error) दृष्टिकोण को एक वैज्ञानिक, डेटा-संचालित ढांचे से बदलना है, जिससे परियोजनाओं में अनावश्यक देरी और संसाधनों की बर्बादी कम हो सके। विभाग इन सेवाओं के लिए कुल परियोजना लागत का 0.25% बीआईआरएसएसी को देंगे।

हालांकि जीआईएस डिजिटल मानचित्र परियोजना के लिए विशिष्ट निवेश आंकड़े सार्वजनिक रूप से नहीं बताए गए हैं, यह पहल बिहार में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास का हिस्सा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अक्टूबर 2026 में घोषणा की थी कि बिहार के लिए लगभग 3.88 ट्रिलियन रुपये की सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिसका लक्ष्य वर्तमान कार्यकाल के अंत तक लगभग 5 ट्रिलियन रुपये के कार्यों को पूरा करना है। इसके अतिरिक्त, बिहार को 10,37... रुपये का आवंटन भी किया गया है, जो राज्य के विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आपके लिए इसका मतलब

बिहार सरकार की यह नई पहल क्या है?

बिहार सरकार ने राज्य के परिवहन नेटवर्क की निगरानी के लिए एक भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित डिजिटल मानचित्र विकसित करने की योजना बनाई है। यह रेलवे, राजमार्गों, पुलों और पर्यावरणीय जोखिमों सहित पूरे परिवहन बुनियादी ढांचे का डिजिटल रिकॉर्ड रखेगा।

बीआईआरएसएसी (BIRSAC) की क्या भूमिका है?

50 करोड़ रुपये से अधिक की सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए, किसी भी वित्तीय स्वीकृति से पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (बीआईआरएसएसी) से तकनीकी अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य है।

विभागों को बीआईआरएसएसी को कितना योगदान देना होगा?

विभाग भू-स्थानिक विश्लेषण सेवाओं के लिए कुल परियोजना लागत का 0.25% बीआईआरएसएसी को देंगे।

भू-स्थानिक विश्लेषण का जनादेश कब से लागू हुआ है?

50 करोड़ रुपये से अधिक की सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भू-स्थानिक विश्लेषण का जनादेश जनवरी 2026 से लागू है।

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