बिहार में 126 किमी गंगा कॉरिडोर का प्रस्ताव: 70,000 करोड़ रुपये का निवेश, निजी क्षेत्र से 50,000 करोड़

ThisNews Desk
बिहार में 126 किमी गंगा कॉरिडोर का प्रस्ताव: 70,000 करोड़ रुपये का निवेश, निजी क्षेत्र से 50,000 करोड़
चित्र: Capturing Rishikesh / Pexels

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 23 अगस्त, 2026 को पटना में ज्ञान भवन में आयोजित एक रोजगार मेले के समापन समारोह में एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की। इस योजना के तहत राज्य के जे.पी. गंगा पथ, जिसे पटना का मरीन ड्राइव भी कहा जाता है, का विस्तार कर इसे 126 किलोमीटर लंबा गंगा कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह प्रस्तावित कॉरिडोर गंगा नदी के किनारे पटना क्षेत्र से सोन नदी पर स्थित कोइलवर तक फैलेगा।

यह परियोजना बिहार के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है और छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकती है। इस विशाल परियोजना के लिए कुल अनुमानित निवेश 70,000 करोड़ रुपये है। इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र से आने की उम्मीद है, जो राज्य के आर्थिक विकास में उनकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

वित्तपोषण मॉडल के अनुसार, बिहार सरकार इस परियोजना में 20,000 करोड़ रुपये का योगदान करेगी। शेष 50,000 करोड़ रुपये निजी संस्थाओं द्वारा निवेश किए जाने का अनुमान है। निजी क्षेत्र के इस बड़े निवेश का मतलब है कि निर्माण, सामग्री आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स और विभिन्न सेवाओं से जुड़े कई छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSMEs) के लिए काम के अवसर खुलेंगे। यह ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और सेवा प्रदाताओं के लिए एक बड़ा बाजार तैयार करेगा।

वर्तमान में, पटना में मौजूद जे.पी. गंगा पथ लगभग 21 किलोमीटर लंबा है। इस शुरुआती हिस्से की शुरुआत तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2013 में की थी और यह 2025 में लगभग 6,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पूरा हुआ था, जिसका पूरा वित्तपोषण राज्य सरकार द्वारा किया गया था।

अगस्त 2026 तक, 126 किलोमीटर लंबा गंगा कॉरिडोर परियोजना अभी प्रस्ताव के चरण में है। इसका विस्तृत वित्तपोषण ढांचा और कार्यान्वयन योजना अभी तैयार की जा रही है। इस परियोजना से न केवल परिवहन सुविधा में सुधार होगा बल्कि गंगा नदी के किनारे के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह बिहार के व्यापार और उद्योग के लिए नई दिशाएं खोलेगा।

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