बिहार मंत्रिमंडल ने राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 336 किलोमीटर लंबे, छह-लेन वाले ग्रीनफ़ील्ड बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण को अपनी मंज़ूरी दे दी है। यह पूरी तरह से एक्सेस-नियंत्रित कॉरिडोर लगभग ₹3,700 करोड़ की अनुमानित लागत से बनाया जाएगा।
यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित की जाएगी, विशेष रूप से डिज़ाइन-बिल्ड-फ़ाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT) ढांचे के तहत। छोटे व्यवसाय मालिकों और ठेकेदारों के लिए, PPP का अर्थ है कि सरकार और निजी कंपनियां मिलकर इस बड़ी परियोजना को पूरा करेंगी, जिससे निजी क्षेत्र के लिए नए अवसर खुलेंगे। DBFOT मॉडल में, एक निजी कंपनी सड़क का डिज़ाइन तैयार करती है, उसका निर्माण करती है, परियोजना के लिए धन जुटाती है, एक निश्चित अवधि तक उसका संचालन (जैसे टोल संग्रह) करती है, और फिर उसे सरकार को हस्तांतरित कर देती है। यह निजी कंपनियों को निवेश करने और अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करने का मौका देता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट ने अगस्त 2026 में इस परियोजना और 12 अन्य प्रस्तावों को औपचारिक रूप से मंज़ूरी दी। कैबिनेट सचिवालय विभाग के सचिव, मो. सोहेल ने इस निर्णय की पुष्टि की।
यह एक्सप्रेसवे एक ग्रीनफ़ील्ड परियोजना होगी, जिसका अर्थ है कि इसे पूरी तरह से नई भूमि पर बनाया जाएगा, न कि मौजूदा सड़क को अपग्रेड करके। यह कॉरिडोर पटना से सीधे नहीं जुड़ेगा; जहानाबाद मौजूदा चार-लेन राजमार्ग के माध्यम से सबसे नज़दीकी कनेक्टिंग पॉइंट के रूप में काम करेगा।
बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (BSRDCL) इस परियोजना को लागू करने के लिए ज़िम्मेदार है। BSRDCL को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के लिए एक सलाहकार और एक लेनदेन सलाहकार नियुक्त करने के लिए अधिकृत किया गया है। DPR एक व्यापक दस्तावेज़ होता है जो परियोजना के सभी तकनीकी, वित्तीय और पर्यावरणीय पहलुओं का विवरण देता है। लेनदेन सलाहकार PPP परियोजनाओं में वित्तीय और कानूनी सलाह प्रदान करता है। DPR एजेंसी के लिए निविदाएं पहले ही छाँटी जा चुकी हैं, और चयनित टीम को मानचित्रों को अंतिम रूप देने के लिए लगभग छह महीने का समय मिलेगा। यह परियोजना बिहार के आर्थिक विकास को गति देने और व्यापार व परिवहन को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
