बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर में बाबा गरीबनाथ कॉरिडोर परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण पहल के पहले चरण के लिए ₹6.19 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य मुजफ्फरपुर के प्रमुख बाबा गरीबनाथ मंदिर का काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर पुनर्विकास करना है, जिसे अक्सर 'बिहार का देवघर' कहा जाता है। इसका लक्ष्य श्रद्धालुओं को विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है।
बिहार पर्यटन विभाग ने इस परियोजना को मंजूरी दी है, और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहली किस्त के रूप में ₹2 करोड़ जारी किए गए हैं। परियोजना का कुल प्रारंभिक बजट ₹25 करोड़ है। निर्माण कार्य श्रावणी मेले के समापन के बाद सितंबर 2026 में शुरू होने वाला है और इसे 12 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन की एक उच्च स्तरीय टीम ने 4 जुलाई, 2026 को स्थल का निरीक्षण किया था।
पहले चरण के प्रमुख विकास कार्यों में मंदिर के अग्रभाग और मुख्य प्रवेश द्वार का सौंदर्यीकरण, ऐतिहासिक साहू पोखर का व्यापक विकास और सौंदर्यीकरण, तथा गांधी चौक के पास और साहू पोखर के पास दो भव्य प्रवेश द्वारों का निर्माण शामिल है। आधुनिक शौचालय, आकर्षक रोशनी, रास्ते, रेलिंग, चारदीवारी और एक आरती डेक भी इस विकास का हिस्सा होंगे। मंदिर के शिखर को भी ऊंचा किया जाएगा। यह परियोजना तीन क्षेत्रों में विभाजित है।
बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी होगी। पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जिलाधिकारी कुमार गौरव, पर्यटन विभाग के संयुक्त सचिव प्रदीप कुमार सिंह और नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह सहित कई अधिकारी इस परियोजना से जुड़े हैं।
यह परियोजना बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए, विशेष रूप से मुजफ्फरपुर के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे मुजफ्फरपुर एक प्रमुख तीर्थस्थल बन जाएगा और लाखों कांवरियों को आकर्षित करेगा, खासकर श्रावणी मेले के दौरान। पर्यटन में वृद्धि से स्थानीय व्यवसायों जैसे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यापार क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे। इससे रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
