बांका और जमुई में तांबा, जिंक और मैग्नेटाइट का खनन शुरू होगा

S Sakar(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 2:02 pm बजे)
बांका और जमुई में तांबा, जिंक और मैग्नेटाइट का खनन शुरू होगा
चित्र: Michael Griswold / Pexels

बिहार सरकार का खान एवं भूतत्व विभाग बांका और जमुई जिलों में महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी की तैयारी में तेजी ला रहा है। यह खबर छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे खनन और संबंधित उद्योगों में नए अवसर खुलेंगे। 23 जुलाई, 2026 तक निविदा दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं, और जल्द ही नीलामी प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

राज्य सरकार विशेष रूप से जमुई जिले में माजोस और भांटा के संयुक्त मैग्नेटाइट ब्लॉक, और बांका जिले में पिन्डारा तांबा-सीसा-जस्ता ब्लॉक की नीलामी की प्रक्रिया में है। इन ब्लॉकों की पहचान भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों के माध्यम से की गई है, जिससे पता चला है कि यहां मूल्यवान खनिज संसाधन मौजूद हैं।

भूवैज्ञानिक अन्वेषणों से महत्वपूर्ण भंडार का पता चला है। जमुई जिले के माजोस के आसपास, लगभग 3 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मैग्नेटाइट के सामान्य अन्वेषण से अनुमानित 48.40 मिलियन टन (यानी लगभग 4 करोड़ 84 लाख टन) खनिज की पहचान की गई है। इसमें औसतन 34.21% लौह (Fe) मौजूद है। यह लौह अयस्क इस्पात उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।

इसी तरह, बांका जिले के पिन्डारा ब्लॉक में, कुल 0.222 मिलियन टन (यानी लगभग 2 लाख 22 हजार टन) तांबा-सीसा-जस्ता अयस्क संसाधन का अनुमान लगाया गया है। इसमें औसतन 0.89% तांबा (Cu) और 2.67% सीसा+जस्ता (Pb+Zn) है, जिसे 0.2% Pb+Zn के कट-ऑफ ग्रेड पर मापा गया है। कट-ऑफ ग्रेड का मतलब है कि इस न्यूनतम मात्रा से अधिक खनिज होने पर ही उसे आर्थिक रूप से खनन योग्य माना जाता है। तांबा बिजली के तारों और अन्य औद्योगिक उपयोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि जस्ता गैल्वनीकरण और बैटरी जैसे उद्योगों में काम आता है।

बांका के पिन्डाराख क्षेत्र में तांबे के भंडार की पहचान के बाद बड़े पैमाने पर खनन कार्यों की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए अध्ययन जारी हैं। यह खनन क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए रास्ते खोलेगा।

बिहार के खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार (प्रमोद कुमार चंद्रवंशी) इस पहल में सक्रिय रूप से शामिल हैं। इन खनिजों की नीलामी से राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, जिससे खनन उपकरण आपूर्तिकर्ताओं, परिवहन सेवाओं और श्रम ठेकेदारों जैसे व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा। यह बिहार के औद्योगिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

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