बिहार के वैशाली जिले में प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) को 133 अनुसूचित जाति (SC) बहुल गांवों में लागू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य इन गांवों का व्यापक और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। यह योजना अनुसूचित जाति समुदायों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
योजना के कार्यान्वयन की रणनीति पर चर्चा के लिए 8 जुलाई, 2026 को वैशाली के पुष्करणी सभागार में एक विभागीय अभिसरण कार्यशाला आयोजित की गई थी। इस कार्यशाला में, जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे चयनित 133 गांवों में सर्वेक्षण कार्य 18 जुलाई, 2026 तक पूरा कर लें। इसका मुख्य लक्ष्य अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि पात्र परिवारों को सभी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
पीएम-अजय योजना केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 में शुरू किया गया था। यह तीन पिछली केंद्र प्रायोजित योजनाओं – प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई), अनुसूचित जाति उप योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए टू एससीएसपी), और बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (बीजेआरसीवाई) का विलय है। यह योजना 100% केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है, हालांकि राज्य सरकारें अतिरिक्त धनराशि का योगदान कर सकती हैं।
बुनियादी ढांचे के विकास के लिए, योजना प्रति गांव ₹20,00,000 का गैप-फिलिंग फंड प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक खर्चों, क्षमता निर्माण, जागरूकता पैदा करने, आवश्यकता आकलन और ग्राम विकास योजनाओं की तैयारी के लिए प्रति गांव ₹1,00,000 आवंटित किए जाते हैं। आय-सृजन योजनाओं के लिए, प्रति लाभार्थी ₹10,000 या ऋण राशि का 50% की सब्सिडी प्रदान की जाती है। यह प्रावधान छोटे व्यवसायियों और उद्यमियों के लिए एक बड़ा अवसर है। 2024-25 में, केंद्र सरकार ने 234 राज्य प्रस्तुतियों में से 83 परियोजनाओं को मंजूरी दी थी और ₹1.18 लाख की धनराशि जारी की थी। मार्च 2025 तक, योजना के तहत 11,000 से अधिक गांवों को "आदर्श ग्राम" घोषित किया जा चुका है, और 2025-26 में इस घटक के लिए 29,846 गांवों का चयन किया गया है।
वैशाली में पीएम-अजय का कार्यान्वयन बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है। यह योजना कौशल विकास और आय-सृजन योजनाओं के माध्यम से लक्षित अनुसूचित जाति आबादी की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखती है, जिससे गरीबी कम होगी। यह सब्सिडी के माध्यम से अनुसूचित जातियों के बीच उद्यमिता को सीधे बढ़ावा देती है। ग्रामीण बुनियादी ढांचे, वित्तीय समावेशन और आजीविका तथा कौशल विकास सहित 10 क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक संकेतकों में सुधार करके, यह योजना एक अधिक मजबूत आर्थिक वातावरण बनाती है। इस व्यापक विकास से नए अवसर पैदा होने और इन ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय आर्थिक हितधारकों को लाभ होगा।
