केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 19 अगस्त, 2026 को बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल ₹13,041 करोड़ की पांच परियोजनाओं को हरी झंडी मिली, जिसमें से ₹3,590.73 करोड़ की लागत से बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 (NH-22) का उन्नयन किया जाएगा।
यह परियोजना मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड के 82.578 किलोमीटर हिस्से को चार लेन का बनाने और उसका उन्नयन करने पर केंद्रित है। यह एक 'ब्राउनफील्ड' परियोजना है, जिसका अर्थ है कि एक नई सड़क बनाने के बजाय, मौजूदा सड़क को ही बेहतर और चौड़ा किया जाएगा। इससे निर्माण कार्य में कुछ विशिष्ट चुनौतियाँ और अवसर पैदा हो सकते हैं, क्योंकि इसमें मौजूदा यातायात और संरचनाओं के साथ काम करना शामिल होगा।
इस परियोजना को 'हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM)' के तहत निष्पादित किया जाएगा। यह एक ऐसा तरीका है जिसमें सरकार और निजी कंपनियां मिलकर काम करती हैं। HAM मॉडल में, सरकार निर्माण लागत का एक हिस्सा (अक्सर 40%) वहन करती है, जबकि शेष राशि निजी डेवलपर द्वारा निवेश की जाती है। सड़क के पूरा होने और चालू होने के बाद, सरकार डेवलपर को निश्चित, आवधिक भुगतान (एन्युटी) करती है ताकि वे अपने निवेश और लाभ को वसूल कर सकें। यह मॉडल निजी कंपनियों के लिए जोखिम को कम करता है और उन्हें गुणवत्तापूर्ण काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है, क्योंकि भुगतान प्रदर्शन से जुड़े होते हैं। बिहार के छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए यह परियोजना निर्माण सामग्री की आपूर्ति, उप-ठेकेदारी और स्थानीय श्रम के लिए नए अवसर पैदा करेगी।
परियोजना को लचीले (ब्लैक-टॉप) फुटपाथ का उपयोग करके 30 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस उन्नयन से क्षेत्र में कनेक्टिविटी में सुधार होगा, व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। बेहतर सड़कें माल ढुलाई को तेज और सस्ता बनाती हैं, जिससे किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को सीधा लाभ होता है।
