एचसीएल और दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के बीच एमओयू, शोध व कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

ThisNews Desk(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 4:17 pm बजे)
एचसीएल और दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के बीच एमओयू, शोध व कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा
चित्र: Anthony Franklin / Pexels

बिहार के गया स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (CUSB) और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) ने 24 जून, 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देना है, जिससे उद्योग और शिक्षा जगत के बीच संबंधों को मजबूत किया जा सके। यह समझौता विशेष रूप से खनन, धातु विज्ञान और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों में अकादमिक शिक्षा और उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के बीच के अंतर को पाटने में मदद करेगा।

इस समझौते के तहत कई ठोस पहलें की जाएंगी। इनमें संयुक्त अनुसंधान और नवाचार-संचालित परियोजनाओं को बढ़ावा देना, छात्रों के लिए इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करना, कौशल वृद्धि और प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना, तथा उद्योग विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को सुगम बनाना शामिल है। छात्रों को इससे बेहतर व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और वे वास्तविक औद्योगिक चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे। इसके अतिरिक्त, CUSB और HCL मिलकर खनन क्षेत्रों में एकीकृत कृषि मॉडल विकसित करने पर भी काम करेंगे, जिससे स्थानीय समुदायों और कृषि-आधारित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को लाभ मिल सकता है।

यह समझौता ज्ञापन बिहार के कार्यबल और संभावित रूप से यहां के व्यवसायों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल और व्यावहारिक अनुभव से लैस करेगा, खासकर खनन और प्राकृतिक संसाधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में। अनुसंधान और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने से औद्योगिक चुनौतियों के लिए समाधान निकल सकते हैं, जिससे मौजूदा व्यवसायों को लाभ होगा और संबंधित क्षेत्रों में नए उद्यमों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह HCL के कोलकाता स्थित कॉर्पोरेट कार्यालय में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री संजीव कुमार सिंह सहित अन्य निदेशक उपस्थित थे। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार से कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह, रजिस्ट्रार प्रोफेसर नरेंद्र कुमार राणा और भूविज्ञान के सहायक प्रोफेसर डॉ. विकल कुमार सिंह मौजूद थे। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस विशेष समझौता ज्ञापन से सीधे तौर पर किसी विशिष्ट निवेश राशि या सृजित होने वाली नौकरियों की संख्या का उल्लेख नहीं किया गया है।

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