बिहार सरकार ने अररिया जिले के फारबिसगंज में एक नए हवाई अड्डे के विकास की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। यह पहल अररिया के लिए घोषित 545.88 करोड़ रुपये की व्यापक विकास परियोजनाओं का हिस्सा है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जुलाई 2026 में बताया कि हवाई अड्डे का निर्माण कार्य अगले वित्तीय वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है, और 2027-28 तक उड़ान सेवाएं शुरू हो सकती हैं।
यह परियोजना 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान सैन्य उपयोग के लिए बनी एक मौजूदा हवाई पट्टी को पुनर्जीवित करेगी, जिसका रखरखाव वर्तमान में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा किया जाता है। मार्च 2026 में, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की थी कि फारबिसगंज में लगभग 150 एकड़ भूमि पर एक आधुनिक हवाई अड्डा बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मार्च 2026 में अररिया के लिए 545.88 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के हिस्से के रूप में इस हवाई अड्डे की योजनाओं की पुष्टि की थी।
अररिया के जिला मजिस्ट्रेट ने राज्य नागरिक उड्डयन निदेशालय को भूमि स्थिति रिपोर्ट सौंप दी है। आवश्यक भूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, लगभग 53 एकड़, पहले ही एएआई को सौंपा जा चुका है और चारदीवारी से सुरक्षित है। अप्रैल 2026 में, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की एक टीम ने हवाई क्षेत्र का सर्वेक्षण किया था, जिससे इसके विकास की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
इस हवाई अड्डे के निर्माण से फारबिसगंज और आसपास के क्षेत्रों के छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों और उद्यमियों को काफी लाभ मिलेगा। बेहतर हवाई संपर्क से माल ढुलाई (सामानों का परिवहन) आसान होगी, व्यापारिक यात्राएं तेज होंगी और क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा। नेपाल सीमा के करीब होने के कारण, यह हवाई अड्डा सीमा पार व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। कनेक्टिविटी में सुधार से कृषि उत्पादों और अन्य वस्तुओं को दूर के बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिससे किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
