बिहार की अर्थव्यवस्था में 2026 में उल्लेखनीय तेज़ी देखी जा रही है, जो राज्य सरकार की नीतिगत पहलों और निवेश प्रयासों का परिणाम है। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा 2 फरवरी, 2026 को प्रस्तुत बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 2024-25 में मौजूदा कीमतों पर 13.1% और वास्तविक शर्तों में 8.6% बढ़ा है। यह राष्ट्रीय औसत से अधिक है, और बिहार देश में सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर है। राज्य की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान 54.8% है, जो इसकी वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राज्य के छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण विकास बिहार MSME नीति 2026 है, जिसे जुलाई 2026 के आसपास सार्वजनिक किया गया। इस नीति का मुख्य उद्देश्य एक करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयों को औपचारिक बनाना और एक करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार पैदा करना है। MSME का अर्थ है छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार सृजन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
यह नीति पर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। इसमें निश्चित पूंजी निवेश का 25-30% तक पूंजीगत सब्सिडी शामिल है। पूंजीगत सब्सिडी का मतलब है कि सरकार नए व्यवसाय शुरू करने या मौजूदा व्यवसाय का विस्तार करने के लिए मशीनरी, भवन आदि खरीदने में मदद के लिए कुछ पैसा देती है। सूक्ष्म उद्यमों के लिए अधिकतम ₹25 लाख, लघु उद्यमों के लिए ₹1.5 करोड़ और मध्यम उद्यमों के लिए ₹5 करोड़ तक की सब्सिडी उपलब्ध है। महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर उद्यमियों को 10% की अतिरिक्त पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी।
उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, नीति के तहत हर जिले में MSME केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ब्लॉक स्तर पर "MSME मित्र" तैनात किए जाएंगे और पंचायत स्तर पर उद्योग सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे। कोसी, भागलपुर, मुंगेर और पूर्णिया में चार प्रौद्योगिकी एवं विस्तार केंद्र भी प्रस्तावित हैं।
हाल के निवेश आंकड़े औद्योगिक विकास के इस अभियान को रेखांकित करते हैं। जुलाई 2026 में दिल्ली में आयोजित 'भारत टेक्स 2026' कार्यक्रम के दौरान, बिहार सरकार ने 16 कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर किए, जिससे कपड़ा और परिधान क्षेत्र में ₹1476 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ। इससे 40,500 से अधिक रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, जून 2026 में, 23 नई परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली, जिससे नौ जिलों में, मुख्य रूप से खाद्य और कपड़ा क्षेत्रों में, ₹1000 करोड़ का निवेश आया और 3,200 से अधिक प्रत्यक्ष रोज़गार पैदा हुए।
